देहरादून की एक सिविल अदालत ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे भाई-बहन के विवाद में आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में देरी करने और समय पर जवाब दाखिल न करने पर प्रतिवादी भाई पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही, बहन के पक्ष में जारी स्टे (यथास्थिति) के आदेश को अगली तारीख तक बरकरार रखा है।
फरियाल मकानदार ने अपने भाई फिरोज अली और अन्य के खिलाफ पैतृक संपत्ति में 1/4 हिस्से के बंटवारे और स्टे के लिए वाद दायर किया है। बहन का आरोप है कि भाई फिरोज अली उसकी मां-बाप की संपत्ति पर उसके शांतिपूर्ण कब्जे में दखल दे रहे हैं। कोर्ट ने जुलाई 2025 में संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने और निर्माण न करने का अंतरिम आदेश दिया था। फिरोज अली ने कोर्ट में अपनी ओर से स्टे हटाने की मांग की। उसका तर्क था कि उसकी बहन दूसरी शादी के बाद से मुंबई में अपने फ्लैट में रहती है और देहरादून की संपत्ति पर उसका कोई कब्जा नहीं है। भाई ने आरोप लगाया कि बहन ने गलत तथ्य बताकर स्टे लिया है और वो इसका गलत इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, कोर्ट ने भाई अर्जी को खारिज कर दिया है।
ट्रैफिक नियम तोड़ने के एक मामले में आरोपी को राहत मिली। आरोपी के अपनी गलती स्वीकार करने पर कोर्ट ने उसे जेल भेजने के बजाय अर्थदंड से दंडित कर मामले को बंद करने का आदेश सुनाया। कोर्ट ने संपत्ति विवाद के मामले में बुजुर्ग महिला को राहत नहीं दी। कोर्ट ने महिला की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उसने बीमारी का हवाला देते हुए घर से गवाही की मांग की थी।
