स्वास्थ्य विभाग की सारी पावर खुद में रखने वाले स्वास्थ्य मुख्यालय को अब कुछ अधिकार जिलों को ट्रांसफर करने होंगे. यह पहला मौका है, जब इस तरह जिलों को पावरफुल बनाते हुए CMO को जिलों के कर्मचारियों को लेकर अधिकारी दिए जाने की तैयारी है. खास बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्री ने इसके लिए मुख्यालय से जुड़े शीर्ष अधिकारियों को दिखा निर्देश जारी कर दिए हैं और अब इसके लिए खाका तैयार करने की तैयारी हो रही है.
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. सालों से लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कार्मिक संबंधी अधिकार स्वास्थ्य महानिदेशालय और मुख्यालय स्तर पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन अब विभाग पहली बार जिलों को अधिक अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को अधिक शक्तियां देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि जिले स्तर पर कर्मचारियों की कार्यशैली, अनुशासन और सेवा व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके.
वर्तमान व्यवस्था में जिले के सबसे वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी होने के बावजूद CMO के पास सीमित प्रशासनिक अधिकार हैं. कई मामलों में उन्हें कर्मचारियों की तैनाती, स्थानांतरण या अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मुख्यालय की ओर देखना पड़ता है.
स्थिति यह है कि जिला स्तर पर कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के स्थानांतरण जैसे मामलों में भी अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर होता है. ऐसे में यदि किसी कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत हो या किसी अस्पताल में स्टाफ की आवश्यकता के अनुसार तैनाती करनी हो, तो प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है. यही वजह है कि कई बार स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जिला स्तर पर अधिक अधिकार मिलने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और जवाबदेही भी तय हो सकेगी.
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं. अस्पतालों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति, मरीजों के प्रति लापरवाही, समय पर सेवाएं उपलब्ध न होना और प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहते हैं. मरीजों और तीमारदारों की ओर से भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं. हालांकि जिला स्तर पर इन मामलों की जानकारी होने के बावजूद CMO के पास पर्याप्त अधिकार न होने के कारण कार्रवाई सीमित रह जाती है.
यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो CMO को कर्मचारियों के स्थानांतरण, पोस्टिंग और कुछ प्रशासनिक कार्रवाइयों के अधिकार मिल सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी.
स्वास्थ्य मंत्री ने हाल के महीनों में विभिन्न जिलों से मिली फीडबैक और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का संज्ञान लिया है. इसके बाद उन्होंने विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर जिला स्तर पर अधिकार बढ़ाने की संभावनाओं पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री का मानना है कि यदि जिले के सर्वोच्च स्वास्थ्य अधिकारी को पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार मिलते हैं तो वह स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर निर्णय ले सकेगा. इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी बल्कि मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.
विभागीय स्तर पर जिस मॉडल पर विचार किया जा रहा है, उसके तहत नर्सिंग स्टाफ समेत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से जुड़े कई प्रशासनिक अधिकार CMO को दिए जा सकते हैं. इनमें स्थानांतरण, पोस्टिंग, कार्य आवंटन और कुछ मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े अधिकार शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी इस बात पर मंथन जारी है कि अधिकारों की सीमा क्या होगी और किन श्रेणियों के कर्मचारियों को इसमें शामिल किया जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग के भीतर लंबे समय से यह शिकायत रही है कि अधिकांश निर्णय मुख्यालय स्तर पर होने के कारण जिला कार्यालयों की भूमिका सीमित हो गई है. कई कर्मचारी और अधिकारी भी सीधे मुख्यालय से संपर्क रखते हैं, जिससे जिला प्रशासन की प्रभावशीलता प्रभावित होती है. नई व्यवस्था लागू होने पर जिला कार्यालयों की अहमियत बढ़ेगी. CMO के निर्देशों और निर्णयों को अधिक महत्व मिलेगा और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो सकेगा.
