जनपद पौड़ी के कोट ब्लॉक में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी की उपचार के दौरान मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जानकारी के अनुसार एक कर्मचारी आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया था. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल पौड़ी से एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया. परिजन गंभीर रूप से घायल कर्मचारी को लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं है.
इसके बाद मरीज को अन्य अस्पताल में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई. इस दौरान काफी समय व्यतीत हो गया. परिजनों का आरोप है कि दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया. घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और रेफरल प्रणाली को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी गंभीर मरीज को हाई सेंटर में रेफर किया जाता है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वहां उपचार और बेड की व्यवस्था उपलब्ध हो, यदि मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद भी उपचार के लिए भटकना पड़े, तो रेफरल व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है.
लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए जिला अस्पतालों और उच्च चिकित्सा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है. जिससे उपचार में देरी न हो और मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके. इस मामले पर जिलाधिकारी ने भी दुख व्यक्त किया है. जिलाधिकारी ने कहा इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं, यदि जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद भी मरीज को एम्स में बेड उपलब्ध नहीं हो पाया, तो यह गंभीर विषय है.
उन्होंने कहा पूरे प्रकरण की जानकारी जुटाई जा रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मरीज को रेफर किए जाने से पहले संबंधित चिकित्सकों अथवा अस्पताल प्रशासन द्वारा एम्स ऋषिकेश से संपर्क किया गया था या नहीं, जिलाधिकारी ने कहा कि मामले की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी. शासन स्तर पर भी इस विषय को उठाया जाएगा. जिससे भविष्य में गंभीर मरीजों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े. फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं.
