ऊर्जा विभाग में अभी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन बड़े पदों पर बैठे अफसर का एक्सटेंशन खत्म ही किया था. वहीं अब फिर से राजनीतिक पैरवी के साथ इसी विभाग में एक और एक्सटेंशन की चिट्ठी घूमने लगी है. हैरत की बात यह है कि विभागीय स्तर पर अधिकारी को सेवा विस्तार देने के लिए इस पैरवी के बाद लिखा पढ़त भी शुरू हो गई है. यह सब तब है, जब पहले ही एक्सटेंशन दिए जाने को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं और खुद तमाम कर्मचारी भी इसका विरोध करते रहे हैं.
उत्तराखंड में सरकारी विभागों में अफसरों को सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) देने की परंपरा एक बार फिर सवालों के घेरे में है. खासकर ऊर्जा विभाग में चल रही गतिविधियों ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है. हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कुछ बड़े अधिकारियों के एक्सटेंशन खत्म किए जाने के बाद उम्मीद जगी थी कि सरकार इस पर सख्त रुख अपनाएगी, लेकिन अब उसी विभाग में एक और अधिकारी को सेवा विस्तार देने की कवायद शुरू होने से चर्चाएं तेज हो गई हैं.

दरअसल मामला किच्छा में तैनात उपखंड अधिकारी दिनेश चंद गुरुरानी से जुड़ा है, जो 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आते ही उनके लिए सेवा विस्तार की कोशिशें तेज हो गई हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह पहल सिर्फ विभागीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए बाहरी पैरवी भी खुलकर सामने आ रही है. व्यापारी संगठनों के साथ-साथ नैनीताल से सांसद अजय भट्ट द्वारा भी इस अधिकारी के पक्ष में पत्र लिखा गया है. ऊर्जा विभाग में इस संबंध में फाइल भी आगे बढ़नी शुरू हो गई है.


इस तरह के मामलों में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठेंगे. युवा और नए अधिकारियों के लिए भी अवसर सीमित हो जाते हैं, जब रिटायर हो चुके अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार दिया जाता है.
उत्तराखंड में एक्सटेंशन कल्चर अब एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है. सवाल यह है कि क्या सरकार इस परंपरा को खत्म कर नई नीति लाएगी, या फिर हर बार की तरह मामले दबाव और सिफारिशों के बीच उलझते रहेंगे.
