दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामलों के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने किया निरीक्षण

बीते दिनों देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से रैगिंग का मामला सामने आया था. जिसके बाद रैगिंग की बढ़ते मामलों को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने छात्रावासों का निगरानी तंत्र को मजबूत किये जाने का निर्णय लिया है. कॉलेज प्रशासन की तरफ से एंटी-रैगिंग स्क्वाड की क्षमता बढ़ाने की तैयारी की गई है और एंटी-रैगिंग कमेटी को छात्रावासों का प्रतिदिन निरीक्षण किये जाने को कहा है.

उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्य ने बीते दिन दून मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने एमबीबीएस-2025 बैच व सीनियर छात्रों से बातचीत करते हुए छात्रों की समस्याओं को सुना और भरोसा दिलाया कि किसी भी शिकायत पर तत्काल समाधान किया जाएगा. डॉ. अजय आर्य ने छात्रों से पढ़ाई, छात्रावास, भोजन, सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल से जुड़ी परेशानियों के बारे में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा कॉलेज प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि निदेशालय के दरवाजे भी छात्रों के लिए हर वक्त खुले हुए हैं.

छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने सलाह दी कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे सबसे अपने शिक्षक या मेट्रन से संपर्क करें और अध्यापक को अपने अभिभावक की तरह समझें. निरीक्षण के दौरान उन्होंने कॉलेज में सुरक्षा उपायों, छात्रावास व्यवस्था, हॉस्टल स्टाफ और एंटी-रैगिंग स्क्वाड की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की गई. इस दौरान डॉ. अजय आर्य ने हॉस्टल में सुझाव पेटिका लगाने को कहा. एंटी-रैगिंग कमेटी को उन्होंने निर्देशित किया कि छात्रावासों का प्रतिदिन निरीक्षण किया जाए और एंटी-रैगिंग स्क्वाड की क्षमता बढ़ाई जाए.

उन्होंने कहा कि यह कदम रैगिंग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और छात्रों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. डॉ. आर्य ने कॉलेज प्रशासन को भी स्पष्ट कहा कि छात्र सुरक्षा और व्यवस्थाओं में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने कहा कि छात्रावासों में किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेकर तत्काल समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होंने आगे कहा कि यह कदम न केवल रैगिंग को रोकने के लिए जरूरी है, बल्कि छात्रावासों में सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए भी अहम है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि निदेशालय मेडिकल कॉलेज को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए संकल्पबद्ध है.

बता दें कि दून मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर छात्रों ने एक सीनियर छात्र पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था. जिसके बाद छात्रों ने इसकी शिकायत सीधे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में दर्ज कराई है. रैगिंग का मामले की शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने कॉलेज प्रशासन को जांच के निर्देश दिए हैं.

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