उत्तराखंड में संविदा कर्मचारियों ने बड़े आंदोलन का फैसला ले लिया है. खास बात ये है कि यह सब त्योहारी सीजन में होने जा रहा है. जिसके चलते आने वाले दिनों में ऊर्जा निगमों में दिक्कत पैदा हो सकती है. मामला संविदा कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा देने से जुड़ा है. जिसको लेकर पिछले लंबे समय से कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की तरफ से इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है.
त्योहारी सीजन में उत्तराखंड वासियों को बड़ा झटका लग सकता है. प्रदेश के ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मचारियों ने अक्टूबर महीने से आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर दिया है. आंदोलन के चलते बिजली सप्लाई पर भी असर पड़ने की संभावना है. जिससे दीपावली और दशहरे जैसे त्यौहारों में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.
संविदा कर्मचारी लंबे समय से मेडिकल सुविधा की मांग उठा रहे हैं. ऊर्जा निगम में 2 हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि प्रबंधन स्तर पर बड़े अधिकारियों को तो मेडिकल सुविधा उपलब्ध है, लेकिन फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों, जिनकी ड्यूटी जानलेवा जोखिमों से भरी रहती है, उनके लिए कोई मेडिकल स्कीम लागू नहीं है.
संविदा कर्मचारियों ने पहले सितंबर में आंदोलन का मन बनाया था, लेकिन राज्य में आपदा जैसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने आंदोलन को टाल दिया. अब उन्होंने अक्टूबर से सांकेतिक आंदोलन करने की घोषणा की है. उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और उग्र होगा.
बता दें कि उत्तराखंड राजकीय शिक्षक संघ पहले ही आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला कर चुका है. जिसके तहत शिक्षक संघ ने परीक्षाओं का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है. इसके अलावा सचिवालय का घेराव करने की रणनीति भी बना चुके हैं. ऐसे में अब ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मचारियों ने भी आंदोलन का ऐलान कर सरकार की मुश्किलें बढ़ाने की तैयारी कर ली है.
