उत्तराखंड में विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे 22,000 उपनल कार्मिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ देने का फैसला बरकरार रखा गया है। दरअसल उपनल कर्मचारी महासंघ समेत अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड हाई कोर्ट नैनीताल के वर्ष 2018 के कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले को कायम रखा है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सभी उपनल कार्मिकों को समान पद समान वेतन देने का निर्णय लिया है।
बता दें उत्तराखंड में कर्मचारी महासंघ की ओर से दायर याचिका की 5 अगस्त को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को यथावत रखा और सरकार से इसका अनुपालन करने को कहा है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा की न्यायालय के निर्णय से सभी पात्र उपनल कार्मिकों को समान कार्य के समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत के आधार पर लाभ मिलने का मार्ग और अधिक मजबूत हुआ है।
बताते चलें समान कार्य समान वेतन का फैसला उन हजारों कार्मिकों के लिए न्याय सम्मान और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो लंबे समय से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे। गौर हो सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में उपनल कर्मियों के पक्ष में फैसला लिया था, जिसमें कहा गया था कि इसका लाभ सभी कर्मियों को दिया जाए। लेकिन 3 फरवरी को शासनादेश निकालते हुए यह कहा जाता है कि निरंतर 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले उपनल से तैनात कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन दिया जाएगा जिसे फिर से बरकरार रखा गया है।
