देहरादून से बड़ी खबर है। उत्तराखंड में बढ़ते तापमान और संभावित हीट वेव को देखते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर स्कूलों में बच्चों की सेहत को लेकर अहम फैसले लिए गए हैं।
बुधवार को उच्चाधिकारियों के साथ हुई बैठक में सीएस ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में नियमित अंतराल पर ‘वॉटर बेल’ बजाई जाए, ताकि छात्र-छात्राएं समय-समय पर पानी पी सकें और डिहाइड्रेशन से बच सकें। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार स्कूलों के समय में बदलाव, कक्षाओं में बेहतर वेंटिलेशन और ओआरएस व जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य में बढ़ती गर्मी को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिले में हीट वेव एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी और राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 24×7 कंट्रोल रूम संचालित कर किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है।
सीएस ने स्पष्ट किया कि गर्मियों में पेयजल की उपलब्धता सबसे अहम है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, बाजार और पंचायत भवनों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जहां पानी की किल्लत की आशंका है, वहां टैंकर, नलकूप और वैकल्पिक जल आपूर्ति की अग्रिम योजना तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सभी अस्पतालों में हीट वेव से प्रभावित मरीजों के लिए पर्याप्त बेड, दवाइयां, ORS और आइस पैक उपलब्ध रखने को कहा गया है। एम्बुलेंस सेवाओं में भी जरूरी संसाधन अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए गए हैं।
खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार गंभीर नजर आ रही है। निर्देश दिए गए हैं कि दोपहर के समय भारी काम से बचा जाए और कार्यस्थलों पर छाया, पानी, ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था हो। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी शेल्टर, प्याऊ और कूलिंग स्पेस बनाने, पार्कों को अधिक समय तक खोलने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने पर जोर दिया गया है। पशुओं के लिए भी पानी और शेल्टर की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक रखने के साथ ही वैकल्पिक योजना तैयार रखने को कहा गया है, ताकि उच्च मांग के समय भी जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
