उत्तराखंड में मॉनसून का कहर लगातार जारी है. बारिश में लैंडस्लाइड की घटनाओं के साथ सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के मामले भी सामने आ रहे हैं. सिर्फ देहरादून शहर में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा सड़कों को नुकसान पहुंचा है. इन सड़कों पर कई जगहों पर गड्ढे हो चुके हैं. लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केवल देहरादून शहर के अंतर्गत प्रांतीय लोग निर्माण विभाग की सड़कों को 7 करोड़ से ज्यादा की लागत का नुकसान हो चुका है.
देहरादून शहर की कैनाल रोड, धोरण आईटी पार्क मार्ग, सुभाष रोड, देहरादून- मसूरी रोड, किंग्रेग से लाइब्रेरी चौक मसूरी, रायपुर रोड, ये कुछ ऐसी सड़के हैं, जहां पर सड़कों का ज्यादा नुकसान हुआ है. लगातार यहां पर नुकसान की भरपाई का काम चल रहा है.
इस पूरे मामले पर देहरादून प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही सभी संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी और अन्य मशीनों को तैनात किया गया था. जिन सड़कों को नुकसान हुआ है, उन्हें रिपेयर करने का भी काम लगातार चल रहा है.
जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में बरसात की वजह से कई जगहों पर गड्ढे बन रहे हैं. इन गड्ढों की मॉनिटरिंग के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा एक मोबाइल टीम बनाई गई है. शहरी क्षेत्र में जहां पर भी गड्ढे हो रहे हैं, दिन के समय जैसे ही समय मिलता है और धूप खिलती है, इन गड्ढों को भरने का काम किया जा रहा है.
वहीं दूसरी तरफ देहरादून शहर में ट्रैफिक कम करने को लेकर बनाया जा रहे बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड प्रोजेक्ट भी अभी अधर में लटका हुआ है. लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की मार्किंग हो चुकी है.
अभी फिलहाल मामला जॉइंट सर्वेक्षण पर अटका हुआ है. क्योंकि इस प्रोजेक्ट की जद में कई केटेगरी की भूमि आ रही है. कुछ लोगों के पक्के मकान हैं तो वहीं कुछ पट्टे पर रहने वाले लोग हैं. कुछ लोगों के पास अपनी जमीन के कागज हैं तो वहीं कुछ लोगों के पास जमीन के कागज नहीं हैं. उन्होंने बताया कि रिस्पना और बिंदाल नदी के दोनों तरफ ज्यादातर मलिन बस्तियां हैं, जो की अव्यवस्थित तरीके से यहां पर निवास करते हैं. निश्चित तौर से इन्हें व्यवस्थित ढांचे में लाना एक बड़ी चुनौती है.
लोक निर्माण विभाग के अधिकारी का कहना है कि फिलहाल राजस्व विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर निगम और फॉरेस्ट विभाग की टीम सभी मिलकर एक साथ जॉइंट सर्वेक्षण कर रहे हैं. इस तरह से इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती लोगों को मौके से हटाना और उन्हें मुआवजा देना है. जिसको लेकर एक्सरसाइज चल रही है. इस एक्सरसाइज के पूरी होने के बाद ही प्रोजेक्ट में कुछ आगे काम बढ़ सकता है. अधिकारी का कहना है कि बरसात के कारण प्रोजेक्ट अपने डेडलाइन से थोड़ा सा डिले जरूर हुआ है. लेकिन आने वाले दिनों में जैसे ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होती है, उसके बाद यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा.
